राजस्थान के 200 से ज्यादा गांवों से निकलेगा 400 किमी. का न्यू एक्सप्रेसवे, 3 घंटे समय की बचत करेगा
इस नए कॉरिडोर के बनने से पचपदरा रिफाइनरी तक पहुंचने में अब करीब 100 किलोमीटर कम दूरी तय करनी पड़ेगी। इतना ही नहीं, यात्रियों का 2 से 3 घंटे का समय भी बचेगा। फिलहाल दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से बालोतरा या पचपदरा जाने के लिए जयपुर, अजमेर, ब्यावर और जोधपुर जैसे व्यस्त हाईवे से गुजरना पड़ता है, जिससे सफर 10 घंटे से ज्यादा लंबा हो जाता है।
कहां से कहां तक बनेगा एक्सप्रेसवे
इस प्रस्तावित एक्सप्रेसवे की शुरुआत दौसा-लालसोट एक्सप्रेसवे के इंटरचेंज पॉइंट अरण्य कलां से होगी। यहां से यह जयपुर के दक्षिणी हिस्सों से होते हुए आगे बढ़ेगा और अंत में बालोतरा के पटाऊ खुर्द के पास जामनगर-अमृतसर एक्सप्रेसवे से जुड़ जाएगा। इसकी कुल लंबाई लगभग 400 किलोमीटर प्रस्तावित है।
यह एक्सप्रेसवे जयपुर, टोंक, अजमेर, ब्यावर, जोधपुर, बालोतरा और बाड़मेर समेत कुल सात जिलों को आपस में जोड़ेगा। मौजूदा अलाइनमेंट के अनुसार टोंक रोड पर जयपुर रिंग रोड से इसकी दूरी मात्र 9 से 10 किलोमीटर रहेगी।
जयपुर जिले में 200 से ज्यादा गांव होंगे कवर
जयपुर जिले में यह हाई-स्पीड कॉरिडोर करीब 110 किलोमीटर तक फैलेगा और कोटखावदा, चाकसू, वाटिका, तूंगा, रेनवाल मांझी, फागी, मौजमाबाद, दूदू और साखून समेत 200 से अधिक गांवों से होकर गुजरेगा। इससे जयपुर-टोंक और जयपुर-अजमेर हाईवे सीधे तौर पर कनेक्ट हो जाएंगे।
इसके अलावा यह एक्सप्रेसवे पुष्कर-मेड़ता रोड, एनएच-25 (बाड़मेर-ब्यावर) और एनएच-62 (पिंडवाड़ा) से भी जुड़ेगा, जिससे पूरे क्षेत्र की कनेक्टिविटी और मजबूत होगी।
औद्योगिक विकास को मिलेगा बढ़ावा
यह नया ग्रीन कॉरिडोर खासतौर पर पचपदरा रिफाइनरी और बाड़मेर क्षेत्र के औद्योगिक विकास के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। इससे लॉजिस्टिक्स आसान होंगे और निवेश को बढ़ावा मिलेगा।
DPR तैयार कर रहा NHAI
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) इस परियोजना की डीपीआर (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तैयार कर रहा है। मंजूरी मिलते ही भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। जिलेवार भूमि अधिग्रहण की जिम्मेदारी संबंधित जिला कलेक्टरों को सौंपी जाएगी।
प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, यह एक्सप्रेसवे उन ग्रीनफील्ड परियोजनाओं में शामिल है, जिन्हें सरकार प्राथमिकता के आधार पर जल्द पूरा करना चाहती है। हाल ही में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की समीक्षा बैठक में भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को तेज करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
पर्यावरण का भी रखा जाएगा ध्यान
इस एक्सप्रेसवे को पूरी तरह ग्रीन कॉरिडोर के रूप में डिजाइन किया जा रहा है। इसमें वन्यजीवों के लिए अंडरपास, ओवरब्रिज और बड़े स्तर पर पौधारोपण की योजना शामिल है ताकि पर्यावरण संतुलन बना रहे।

