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डूंगरपुर जिले के 14 गांवों ने शादियों में सोने-चांदी जेवरात इस्तेमाल पर लगाया बैन, महापंचायत में लिया फैसला

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डूंगरपुर जिले के 14 गांवों ने शादियों में सोने-चांदी जेवरात इस्तेमाल पर लगाया बैन, महापंचायत में लिया फैसला
राजस्थान के डूंगरपुर जिले के साबला और आसपुर इलाके के 14 गांवों के आदिवासी समाज ने बढ़ती महंगाई और शादी-समारोहों में हो रहे अत्यधिक खर्च को लेकर सामूहिक निर्णय लिया है। ओडा गांव में आयोजित एक बैठक में समाज सुधार और फिजूलखर्ची पर रोक लगाने के उद्देश्य से कई नए नियम तय किए गए।

महंगे आभूषणों पर रोक

सोने और चांदी की लगातार बढ़ती कीमतों को देखते हुए समाज ने विवाह समारोहों को सादगीपूर्ण बनाने का निर्णय लिया है। अब शादी में सोने के गहने पहनने या देने की अनुमति नहीं होगी। वहीं चांदी के गहनों की सीमा अधिकतम 50 ग्राम तय की गई है, ताकि गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों पर आर्थिक दबाव न पड़े।

शादी में सादगी का संदेश

समाज ने यह भी तय किया कि विवाह के दौरान कपड़ों या अन्य वस्तुओं का लेन-देन नहीं किया जाएगा। केवल पारंपरिक ‘मामेरा’ की रस्म को ही मान्यता दी जाएगी। डीजे और अन्य भव्य व्यवस्थाओं पर भी रोक लगा दी गई है। करियावर के नाम पर होने वाले अतिरिक्त खर्च को पूरी तरह समाप्त करने पर सहमति बनी है।

युवाओं के लिए नए दिशा-निर्देश

बैठक में युवाओं के भविष्य और सुरक्षा पर भी चर्चा हुई। नाबालिग बच्चों को बाइक नहीं देने और बालिग युवाओं के लिए हेलमेट अनिवार्य करने का निर्णय लिया गया। साथ ही अविवाहित लड़कियों को मोबाइल फोन देने से परहेज करने की बात भी रखी गई।

शिक्षा पर विशेष जोर

समाज के वरिष्ठ सदस्यों ने कहा कि वास्तविक विकास शिक्षा से ही संभव है। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों को नियमित रूप से विद्यालय भेजने और पढ़ाई पर ध्यान देने का आग्रह किया।

सर्वसम्मति से यह भी तय किया गया कि जो व्यक्ति इन सामाजिक नियमों का पालन नहीं करेगा, उसके विरुद्ध समाज स्तर पर कार्रवाई की जाएगी।

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