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Supreme court : बूढ़ी मां की संपत्ति पर लालची बेटों की थी बुरी नजर, सुप्रीम कोर्ट कहीं यह बड़ी बात

हमारे देश में मां-बाप को भगवान से काम नहीं माना जाता है। परंतु कई बार संतान अच्छी होती है जो उनकी भरपूर सेवा करती है। कुछ बच्चे संपत्ति के लालच में आकर अपने मां-बाप को प्रताड़ित करने लगते हैं। आज ऐसा ही मामला सुप्रीम कोर्ट में आया है जहां बेटों ने संपत्ति के लालच में अपनी मां को प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें जमकर फटकार लगाई। चलिए जानें क्या है पूरा मामला
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Supreme court : बूढ़ी मां की संपत्ति पर लालची बेटों की थी बुरी नजर, सुप्रीम कोर्ट कहीं यह बड़ी बात

Saral Kisan, Supreme court Decision : भारत में संपत्ति विवाद के मामले हर दिन सुनने को मिलते हैं। लेकिन संपत्ति के लिए माता-पिता को पीड़ित करने के मामले बहुत शर्मनाक हैं। बिहार के मोतिहारी में रहने वाले एक बेटे को सुप्रीम कोर्ट ने अपनी 89 साल की बुजुर्ग मां की संपत्ति के बारे में कोई भी सौदा करने से रोक दिया है। न्यायमूर्ति धनंजय यशवंत चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति सूर्यकांत की पीठ ने गंभीरता से संज्ञान लिया कि एक मां जो चल नहीं सकती, उसका बेटा मोतिहारी के रजिस्ट्रार के कार्यालय में उसका अंगूठा लगवाने ले गया था।

सुप्रीम कोर्ट के जजों ने इस मामले पर कहा कि आपकी दिलचस्पी उनकी संपत्ति में अधिक दिखती है। यही हमारे देश के वरिष्ठ नागरिकों की दुर्दशा है। बुजुर्ग वैदेही सिंह की संपत्ति की खरीद-फरोख्त पर अदालत ने अगले आदेश तक रोक लगा दी है। अब पीठ इस मामले को 17 तारीख को सुनेगी।
बुजुर्ग वैदेही सिंह डिमेंशिया से पीड़ित हैं और कुछ भी समझने और पहचानने में असमर्थ हैं।

जजों ने इस मामले में उसके बेटे के वकील से पूछा कि क्या नोएडा में उसकी छोटी बहनों को घर या अस्पताल में अपनी मां की देखभाल की इजाजत दी जा सकती है। ऐसा ही परामर्श डाक्टरों ने दिया है।

याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रिया हिंगोरानी और मनीष कुमार शरण ने कहा कि वैदेही सिंह का पुत्र अपने किसी भी भाई-बहन को अपनी मां से मिलने की अनुमति नहीं देता है। जजों ने वैदेही सिंह (property rights of senior citizens) को अपने अधीन रखने वाले उनके पुत्र कृष्ण कुमार सिंह से कहा कि वह अपना पक्ष रखें ताकि कोर्ट सही आदेश दे सके।

इस मामले में आपको बता दें कि वैदेही सिंह की बेटी के पास नोएडा में दो कमरों का एक फ्लैट है, जैसा कि कृष्ण कुमार सिंह के वकील ने बताया है। इसलिए वे मां को सही ढंग से नहीं रख पाएंगे। जजों ने कहा कि घर की आकार नहीं, दिल की आकार महत्वपूर्ण है। जजों ने कहा कि मां की खराब स्थिति के बावजूद बेटा अपनी संपत्ति बेचने के लिए रजिस्ट्रार कार्यालय (registrar office for selling property) ले गया। क्योंकि उन्हें कोई सुध नहीं मिलती। 

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