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राजस्थान के 43 गांवों से गुजरेगा नया एक्सप्रेसवे, रियल एस्टेट मजबूत होगा, बड़े औद्योगिक केंद्रों से संपर्क बढ़ेगा

Rajasthan News: राजस्थान में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को गति देने के लिए केंद्र सरकार लगातार बड़ी परियोजनाओं पर काम कर रही है। इसी कड़ी में कोटपूतली–बीकानेर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है, जो पूरे शेखावाटी क्षेत्र की तस्वीर बदलने की क्षमता रखती है। 

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राजस्थान के 43 गांवों से गुजरेगा नया एक्सप्रेसवे, रियल एस्टेट मजबूत होगा, बड़े औद्योगिक केंद्रों से संपर्क बढ़ेगा

Sikar Greenfield Expressway: राजस्थान में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को गति देने के लिए केंद्र सरकार लगातार बड़ी परियोजनाओं पर काम कर रही है। इसी कड़ी में कोटपूतली–बीकानेर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है, जो पूरे शेखावाटी क्षेत्र की तस्वीर बदलने की क्षमता रखती है। करीब 295 किलोमीटर लंबा यह 6-लेन एक्सप्रेसवे सीधे तौर पर दिल्ली, जयपुर और गुजरात से कनेक्टिविटी को नया आयाम देगा। इसके निर्माण से सीकर जिले के नीमकाथाना, रींगस, श्रीमाधोपुर और पाटन जैसे क्षेत्रों को खास फायदा मिलने की उम्मीद है।

DPR तैयार, भूमि चिह्नीकरण तेज

परियोजना से जुड़े सूत्रों के अनुसार एक्सप्रेसवे के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार कर ली गई है। वर्तमान में जमीन चिह्नीकरण के लिए विभिन्न स्थानों पर पिलर लगाने का कार्य जोर-शोर से जारी है। राज्य सरकार और एनएचएआई मिलकर भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को गति दे रहे हैं। विशेष बात यह है कि केवल सीकर जिले में ही यह एक्सप्रेसवे 43 गांवों से होकर गुजरेगा, जिनमें से 30 गांव सिर्फ नीमकाथाना क्षेत्र के हैं। सरकार ने उन गांवों की सूची भी जारी कर दी है जिनकी भूमि इस परियोजना के लिए अधिग्रहित की जाएगी। भूमि स्वामियों के लिए मुआवजा प्रक्रिया भी प्रारंभ की जा चुकी है, ताकि निर्माण कार्य समय पर शुरू हो सके।

औद्योगिक कनेक्टिविटी होगी मजबूत

एक्सप्रेसवे के पूरा होने के बाद पूरे शेखावाटी क्षेत्र की औद्योगिक पहुंच में महत्वपूर्ण सुधार देखने को मिलेगा। नीमकाथाना से रोजाना बड़ी मात्रा में टाइल्स निर्माण में उपयोग होने वाला पाउडर गुजरात की फैक्ट्रियों में भेजा जाता है। एक्सप्रेसवे बनने से यह परिवहन और तेज तथा लागत में सस्ता हो जाएगा। इससे व्यापारियों के मुनाफे में वृद्धि के साथ नया औद्योगिक निवेश भी आकर्षित होगा।

दिल्ली, जयपुर, बीकानेर और गुजरात के औद्योगिक केंद्रों से सीधे संपर्क के चलते रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। विशेषज्ञों के मुताबिक आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र में नए छोटे-बड़े उद्योग और वेयरहाउसिंग हब विकसित हो सकते हैं।

किसानों और आम यात्रियों को मिलेगा लाभ

वर्तमान में दिल्ली जाने के लिए पाटन–कोटपूतली मार्ग और जयपुर जाने के लिए अजीतगढ़–चौमूं रोड पर भारी ट्रैफिक रहता है। इन मार्गों पर लगातार जाम लगने की वजह से यात्रियों का समय भी अधिक लगता है। एक्सप्रेसवे चालू होने के बाद मौजूदा राष्ट्रीय और राज्य मार्गों पर ट्रैफिक का दबाव काफी हद तक कम होने की संभावना है। किसान भी इस परियोजना से सीधे लाभान्वित होंगे। कृषि उत्पादों को बड़े शहरों के बाजारों तक कम समय में पहुंचाया जा सकेगा, जिससे उनकी लागत घटेगी और उपज का बेहतर दाम मिल सकेगा। साथ ही तेज परिवहन के कारण खराब होने वाली वस्तुओं के नुकसान में कमी आएगी।

जमीनों के रेट में तेजी की संभावना

परियोजना के प्रभाव क्षेत्र में आने वाले गांवों और कस्बों में जमीन की कीमतों में पहले से ही बढ़ोतरी देखी जा रही है। प्रॉपर्टी विशेषज्ञों का मानना है कि एक्सप्रेसवे बनने के बाद इन इलाकों में भूमि मूल्य 20–40 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। इसका फायदा स्थानीय निवासियों, किसानों और निवेशकों सभी को होगा। साथ ही आने वाले वर्षों में यहां नई औद्योगिक टाउनशिप और कमर्शियल हब विकसित होने की संभावनाएं भी बढ़ जाएंगी।

इन गांवों से होकर गुजरेगा एक्सप्रेसवे

यह ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे सीकर जिले की पाटन, नीमकाथाना, खंडेला, श्रीमाधोपुर और रींगस तहसीलों के कुल 43 गांवों से होकर गुजरेगा।

सूची में प्रमुख गांव शामिल हैं

पाटन क्षेत्र - फतेहपुरा, कुरदिया, रामसिंहपुरा सहित अन्य

नीमकाथाना क्षेत्र - भराला, हीरानगर, गणेश्वर, प्रीतमपुरी और कई अन्य

रींगस व श्रीमाधोपुर क्षेत्र - कई ग्रामीण इलाकों को सीधा लाभ मिलेगा

क्षेत्रीय विकास को मिलेगी नई दिशा

परियोजना विशेषज्ञों का अनुमान है कि एक्सप्रेसवे बनने के बाद पूरे शेखावाटी क्षेत्र में रियल एस्टेट, व्यापार, कृषि विपणन और उद्योगों में तेज वृद्धि देखने को मिलेगी। यह एक्सप्रेसवे सिर्फ परिवहन नहीं, बल्कि क्षेत्र के समग्र विकास का एक बड़ा माध्यम बनेगा।

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