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अमेरिका की इस कंपनी से रतन टाटा ने 10 साल बाद लिया अपने अपमान का बदल

Ratan Tata: रतन टाटा आज, 28 दिसंबर को 86 वर्ष का हो गया है। हम आज आपको उनकी उस कहानी बताने जा रहे हैं जब वे इस कंपनी में अपमानित हुए और फिर 10 साल बाद इस अपमान का बदला लिया..।
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Ratan Tata took revenge for his insult from this American company after 10 years

Saral Kisan : रतन टाटा, भारत के प्रसिद्ध कारोबारी, ने टाटा समूह के कारोबार को उच्चतम स्तर पर लाया और देश के उद्योग जगत को विश्वव्यापी मान्यता दी। रतन टाटा ने 1991 में टाटा ग्रुप का नेतृत्व किया और कंपनी का कारोबार विश्वव्यापी बनाया। रतन टाटा आज दुनिया भर में टाटा का नाम है। रतन टाटा की सादगी और सरल स्वभाव लाखों लोगों को प्रेरणा देते हैं। रतन टाटा अपनी दरियादिली, शांत और सरल स्वभाव के कारण हर किसी को अजीज बनाते हैं।  

बिना बोलकर अपमान का बदला कैसे लिया?

रतन टाटा से बहुत सी जीवन-शिक्षा मिलती है। अमेरिकी कंपनी भी इसी तरह की कहानी से जुड़ी है, जहां रतन टाटा ने अपमान का बदला बिना बोलने के कैसे लिया जा सकता है। 90 के दशक में रतन टाटा कंपनी बढ़ी।

टाटा मोटर्स ने उनके नेतृत्व में टाटा इंडिका कार बनाई।  कार बन गई, लेकिन देश में कारों की बिक्री बहुत कम थी। रतन टाटा ने नहीं सोचा था कि इंडिका कार के प्रति लोगों की प्रतिक्रिया ऐसी होगी। रतन टाटा ने घाटा बढ़ने पर पैसेंजर कार डिवीजन को बेचने का निर्णय लिया।

टाटा अपमानित हो गया था।

रतन टाटा ने फोर्ड मोटर्स (Ford Motors) को अपनी पैंजेकर कार डिवीजन को बेचने के लिए बातचीत शुरू की। इस समझौते के लिए रतन टाटा फोर्ड के अमेरिकी मुख्यालय पहुंचें। उस समय फोर्ड का अध्यक्ष बिल फोर्ड था। बातचीत के दौरान, रतन टाटा को बिल फोर्ड ने बहुत मजाक उड़ाया। उन्होंने रतन टाटा को बदनाम करते हुए कहा कि वह कार बनाने के बारे में कुछ भी नहीं जानता था, तो फिर कार बनाया क्यों? उन्होंने टाटा को बदनाम किया और कहा कि अगर वह टाटा के उस कारोबार को खरीदते हैं तो यह उनके लिए बहुत अच्छी बात होगी।  रतन टाटा चुपचाप इस घृणा को पीकर रह गए और बिना कुछ कहे भारत लौट आए।  

10 साल बाद माफी मांगी -

रतन टाटा ने अमेरिका छोड़कर अपने पैसेंजर कार बिजनेस को बेचने से इनकार कर दिया। उन्होंने कार सेक्टर को बढ़ाने का लक्ष्य रखा। रतन टाटा ने निरंतर काम करते हुए 10 सालों में टाटा मोटर्स को ऑटोसेक्टर में विजेता बनाया। टाटा मोटर्स नए शिखरों पर चढ़ गया, जबकि फोर्ड की हालत बदतर हो गई।

10 साल बाद, फोर्ड मोटर्स दिवालिया होने के कगार पर था। कंपनी बेच दी गई थी। रतन टाटा ने फोर्ड के जॉर्ड रेवर और जॉर्ज को खरीद लिया। सीन बदल गया था जब रतन टाटा और बिल फोर्ड दोबारा मिले। जिस व्यक्ति ने रतन टाटा का अपमान किया था, आज उन्हें धन्यवाद दे रहा था। रतन टाटा ने उनसे कहा कि आपने जैगुआर और लैंड रोवर खरीदकर हम पर इच्छा व्यक्त की है।

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