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अरहर की खेती में उर्वरक और कीटनाशक का सही तरीके से करें इस्तेमाल, मिलेगा ज्यादा उत्पादन

Arhar Ki Kheti : भारत देश के कृषि प्रधान देश है, यहां पर ज्यादातर लोग कृषि पर निर्भर करते हैं, किसान खेती बाड़ी कर अच्छा मुनाफा कमाते हैं।

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अरहर की खेती में उर्वरक और कीटनाशक का सही तरीके से करें इस्तेमाल, मिलेगा ज्यादा उत्पादन

Arhar Ki Kheti : खेती-बाड़ी करने के लिए किसान जागरुक है, आज के युग में आधुनिक खेती की जाती है, किसान उसे तरह का बीज होता है जो कम लागत में अधिक मुनाफा दे, अगर हम बात करें अरहर की खेती की तो यह खेती किसानों के लिए लाभदायक है।

अरहर मुख्य दालहनी फसलों में मानी जाती है, इसकी खेती खरीफ सीजन में की जाती है, अरहर की फसल से खेत की मिट्टी उपजाऊ बनती है, नरमा कपास की तरह अरहर की फसल जमीन को नहीं कमजोर करती, किसान फसल बोने से पहले खेत की जुताई अच्छी कर ले।

अरहर की खेती के लिए दोमट मिट्टी की आवश्यकता होती है, अरहर की फसल  कम पानी में  पैक कर तैयार हो जाती है, अगर किसान अपनी फसल को रोग कीट पतंग से बचा लेता है, और अच्छे से खाद संरक्षण करता है तो लगभग 10 से 12 क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन हो जाता है।

बुवाई और बीज दर

अरहर के अच्छे उत्पादन के लिए सही समय पर इसकी बुवाई करना जरूरी है. इसकी अच्छी उपज पानी के लिए किसानों को इसकी बुवाई मध्य जून से लेकर मध्य जुलाई तक कर देना चाहिए. प्रति हेक्टेयर 20 किलोग्राम बीज की दर से इसकी बुवाई करनी चाहिए. बुवाई से पहले रोग मुक्त करने और पौधौं की अच्छी बढ़वार के लिए बीजों को उपचार जरूर करना चाहिए. बीजों की बुवाई से पहले राइजोबियम कल्चर से बीजों को उपचारित करना लाभदायक होता है. 

खाद और उन्नत किस्म

अरहर की अच्छी पैदावार के लिए खेत में खाद की उचित मात्रा पर भी विशेष ध्यान देना पड़ता है. खेत तैयार करते समय अंतिम जुताई के वक्त 12 किलोग्राम यूरिया, 100 किलोग्राम डीएप और 40 किलोग्राम पोटाश को प्रति हेक्टेयर की दर से खेत में डालना चाहिए. अरहर की उन्नत किस्मों की बात करें तो बिरसा अरहर-1, बहार, लक्ष्मी, आईसीपीएल-87119, नरेंद्र अरहर-1, नरेंद्र अरहर-2, मालवीय-13, एनटीएल-2 जैसी किस्मों का उपयोग कर सकते हैं. 

कीट और रोग नियंत्रण

अरहर की खेती में कई प्रकार के फली छेदक कीटों का आक्रमण होता है. इसके उपज में भारी कमी आती है. इसके नियंत्रण के लिए दो या तीन बार कीटनाशक का छिड़काव करना चाहिए. पहला छिड़काव इंडोस्कार्ब 0.5 मिली प्रति लीटर पानी के साथ मिलाकर करें. फल निकलने की अवस्था में इसका छिड़काव करना चाहिए. दूसरा छिड़काव मोनो क्रोटोफॉस का करना चाहिए जो 15 दिनों के बाद किया जाता है. इसके अलावा अरहर में उकठा रोग का भी प्रकोप होता है. इसलिए रोग से ग्रस्त पौधों को खेत से उखाड़कर फेंक देना चाहिए.   

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