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राजस्थान की चंबल समेत सभी नदियों और बांधों को डेटा कण्ट्रोल सिस्टम से जोड़ने की तैयारी में सरकार

Rajasthan News: राजस्थान की प्रमुख नदियों और बांधों को लेकर बड़ी अपडेट सामने आई हैं। राजस्थान की प्रमुख नदियों पर बने बांधों को केन्द्र सरकार ने सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डेटा एक्विजिशन से जोड़ने के लिए तारीख तय कर दी हैं। टेक्नोलॉजी के इस समय में राजस्थान को बड़ी सौगात मिली हैं। 

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राजस्थान की चंबल समेत सभी नदियों और बांधों को डेटा कण्ट्रोल सिस्टम से जोड़ने की तैयारी में सरकार

Rajasthan News: केन्द्र सरकार ने राजस्थान की प्रमुख नदियों और बांधों को लेकर बड़ा फैसला लिया हैं। केन्द्र सरकार ने प्रदेश के लिए डिजिटल कुंडली अब तैयार कर ली हैं। टेक्नोलॉजी के इस समय में स्काडा में प्रमुख नदियों और बांधों को जोड़ा जाएगा। बता दे की मानसून के समय नदी और बांध में किस स्तर पर पानी की आवक चल रही हैं। बांध के कैचमेंट इलाके में बरसात, पानी की आवक यंत्रों के तहत गणना करके डाटा जुटाया जा रहा हैं। डाटा तैयार करने के बाद ही इसी आधार पर पानी को छोड़ा जाएगा। प्रदेश में 12 विभागों को आपस में कनेक्ट कर के पानी का डाटा तैयार कर साझा किया जाएगा। इसी आधार पर बाढ़ की स्थिति का पूर्वानुमान का अनुमान लगाया जा सकेगा। बता दे की संबंधित एजेंसिया इसी आधार पर पहले से सक्रिय होकर हानि का अनुमान लगा के होने वाले नुकसान को रोका जा सकेगा।  

राजस्थान की प्रमुख नदियों पर बने बांधों को सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डेटा एक्विजिशन के तहत जोड़ा जाएगा। इस को लेकर अब डेट लाइन अब तय कर दी गई हैं। प्रदेश में चम्बल नदी पर बने तीनों बांध भी इस योजना में शामिल हैं। कोटा बैराज, राणा प्रताप सागर बांध और जवाहर सागर बांध को इस परियोजना के तहत स्काडा से जोड़ा जाएगा। 

कितनी आएगी लागत 

इस परियोजना में करीब 134.58 करोड़ की लागत आएगी। बता दे की यह परियोजना जल शक्ति मंत्रालय, जल संसाधन, नदी विकास और गंग संरक्षण विभाग के तहत वित्त पोषित हैं। यह योजना को देश की केन्द्र सरकार अनुदानित प्रदान करती हैं। इस योजना में अबतक लगभग 56 करोड़ 26 लाख रुपया खर्च किया जा चुका हैं। 

यह स्काडा से जुड़े

वर्तमान में राज्य में स्थापित 170 स्वचालित वर्षा मापी यंत्रों, 150 भूजल मापी यंत्रों, 143 स्वचालित जल स्तर मापी यंत्रों और 25 स्वचालित मौसम स्टेशन संयंत्रों से डेटा प्राप्त किया जा रहा है। NWIC के पोर्टल पर इस जानकारी को साझा भी किया जा रहा है। साथ ही चम्बल नदी पर निर्मित राणा प्रताप सागर बांध, जवाहर सागर बांध, बीसलपुर, माही, गुढ़ा और जवाई बांध भी स्काडा प्रणाली से जुड़े हुए हैं।

यहां कार्य हो गया शुरू 

प्रदेश के कोटा बैराज, पार्वती बांध धौलपुर, छापी बांध झालावाड़ और सोम कमला अम्बा बांध डूंगरपुर में स्काडा प्रणाली का निर्माण कार्य चल रहा है। पारदशी जल के लिए नर्मदा नहर परियोजना द्वारा सांचौर, गंग नहर और भांखड़ा नहर, श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ की नहरों पर स्काड़ा प्रणाली बनाई जा रही है। इससे भी चम्बल की नहरों को जोड़ा जाएगा। इस प्रस्ताव पर मध्यप्रदेश और राजस्थान अंतरराज्यीय तकनीकी कमेटी की बैठक में चर्चा हुई है।

क्या है स्काडा

स्काडा एक सुपरवाइजरी नियंत्रण और डेटा एक्विजिशन प्रणाली है। स्काडा प्रणाली हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर का एक समूह है जो ऑपरेशनल टेक्नोलॉजी (ओटी) को वास्तविक समय डेटा कैप्चर करके औद्योगिक प्रक्रियाओं को स्वचालित करता है। स्काडा ने एक ऑनसाइट या दूरस्थ सर्वर से मोटर, पंप और वाल्व जैसे उपकरणों की निगरानी करने वाले सेंसरों को जोड़ा है। वास्तविक समय में जानकारी मिल सकेगी। स्काडा सिस्टम बांधों में पानी की आवक पर निगरानी रखने और बाढ़ों को नियंत्रित करने में उपयोगी है। स्काडा को अब कोटा बैराज भी मिलेगा। इसे टेंडर किया जा रहा है।

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