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MP में बन रहीं सबसे लंबी आउटर रिंग रोड, सैटेलाइट के माध्यम से होगी वाहन की ट्रेकिंग

MP News : मध्य प्रदेश में सबसे बड़ी आउटर रिंग रोड का निर्माण किया जा रहा है। आउटर रिंग रोड निर्माण के बाद लोगों का सफर आसान होने वाला है। लेकिन इस आउटर रिंग रोड पर चलने के लिए लोगों को जेब ढीली करनी पड़ेगी। 

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MP News : मध्य प्रदेश में बन रहीं सबसे लंबी आउटर रिंग रोड, सैटेलाइट के माध्यम से होगी वाहन की ट्रेकिंग 

MP Ringh Road : MP में सबसे लंबा 114 किलोमीटर आउटर रिंग रोड का निर्माण कार्य चल रहा है। इस आउटर रिंग रोड पर सेटेलाइट के माध्यम से वाहनों को ट्रैक किया जाएगा। इस कार्य को डिजिटल रूप में अंजाम दिया जाएगा। इस रिंग रोड पर कुल 3500 करोड़ की लागत आएगी। 

पांच अलग-अलग हिस्सों में होगा निर्माण

इस रिंग रोड को पांच अलग-अलग हिस्सों में निर्माण किया जाएगा। रिंग रोड के चार हिस्सों पर काम शुरू हो गया है, बाकी एक हिस्से को केंद्र सरकार से मंजूरी प्राप्त हो गई है। रिंग रोड का पांचवा हिस्सा बरेला से अमझर घाटी के बीच बनेगा। करीब 16 किलोमीटर रोड का निर्माण राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण एलाइनमेंट लोक निर्माण विभाग के तहत बनाया जाएगा। 

मार्ग में सेना की ज्यादा भूमि थी, जिसे बिना इस्तेमाल किए यह एलाइनमेंट तय करना था। विभाग ने प्रस्ताव को केंद्रीय मंत्रालय को भेजा, जो मंजूर कर लिया गया है। इस अंतिम चरण के परियोजना के लिए अब जुलाई में निविदा निकाली जाएगी। बता दें कि यह काम 480 करोड़ रुपये की लागत से पूरा होगा। इसमें सेना और वन क्षेत्र को छोड़कर मार्ग बनाया गया है।

दाखिल और निकासी के लिए करीब 15 पॉइंट

टोल रोड पर दाखिल और निकासी के लिए करीब 15 पॉइंट बनाए जाएंगे। जिनके माध्यम से रोड में वाहन प्रवेश करेगा। हर पॉइंट पर उपकरण के माध्यम से वाहन में लगे फास्टैग की स्क्रीनिंग होगी। जिसके बाद जिस पाइंट से वाहन की निकासी होगी उसके किलोमीटर के हिसाब से राशि स्वतः ही कट जाएगी। अभी जिस तरह राष्ट्रीय राजमार्ग में चलने के लिए वाहनों काे फास्टैग अनिवार्य है उसी तरह की व्यवस्था यहां होगी। प्राधिकरण ने बताया कि रिंग रोड से लगे ग्रामीणों को आवाजाही के लिए अलग से सर्विस रोड बनेगी ताकि उनके वाहन मुख्य मार्ग पर न आ सके।

टोल रोड पर प्रवेश और बाहर निकलने के लिए लगभग पंद्रह स्थान बनाए जाएंगे। जिनके तहत से सड़क पर वाहन चलेंगे। उपकरण हर जगह वाहन के फास्टैग को देखेगा। वाहन को जिस पाइंट से निकाला जाएगा, उसके किलोमीटर के हिसाब से राशि स्वचालित रूप से घट जाएगी। वर्तमान में राष्ट्रीय राजमार्ग पर वाहनों के लिए फास्टैग की आवश्यकता होगी। प्राधिकरण ने कहा कि रिंग रोड से लगे ग्रामीणों के लिए अलग से सेवामार्ग बनाया जाएगा. इससे वाहन रिंग रोड पर नहीं आ सकेंगे।

लागत के हिसाब से तय होगा लागत के हिसाब शुल्क

रिंग रोड की लागत और ब्रिज सहित अन्य सुविधाओं का मूल्यांकन किया जाएगा, राष्ट्रीय राजमार्ग प्रोजेक्ट डायरेक्टर अमृत लाल साहू ने कहा। इसके बाद, प्रत्येक किलोमीटर पर अलग-अलग श्रेणी के वाहनों से प्रतिशत उठाया जाएगा।

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