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बिहार के इस शहर में बनेगा देश का सबसे लंबा पुल, 171 पिलर के साथ इतनी होगी लंबाई

Bihar Bridges News : केंद्रीय परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की ओर से 984 करोड़ की लागत राशि अब लगभग 1200 करोड़ तक पहुंच गई है.10.2 किलोमीटर लंबे महासेतु का निर्माण कार्य की गति तेजी कर दी गई है. इस पुल के निर्माण के बाद सुपौल से मधुबनी की दूरी 30 किलोमीटर कम हो जाएगी.
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The country's longest bridge will be built in this city of Bihar, its length will be this much with 171 pillars.

Saral Kisan : भारत का सबसे बड़ा सड़क पुल असम का भूपेन हजारिका सेतु है. इस पुल को ढोला-सदिया सेतु के रूप में भी जाना जाता है जो ब्रह्मपुत्र नदी पर 9.15 किमी से अधिक लंबा है. लेकिन क्या आपको पता है कि अब इससे भी बड़ा पुल बिहार में लगभग बनकर तैयार है. जी हां, यह भारत का सबसे बड़ा पुल होगा जिसकी लंबाई 10 किलोमीटर से भी अधिक होगी. आइए लेटेस्ट तस्वीरों के साथ इस पुल के बारे में पूरा जानकारी लेते हैं. भारत माला प्रोजेक्ट के तहत बिहार में चार एक्सप्रेस वे भी बन रहे हैं. इन एक्सप्रेस वे के बन जाने से बिहार के किसी भी हिस्से से कोलकाता और दिल्ली की दूरी काफी घट जाएगी. इसके साथ ही अंतर राज्य आवागमन बेहद आसान हो जाएगा.

मार्च 2024 तक होगा कार्य पूरा

कोसी नदी पर मधुबनी के भेजा और सुपौल के बकौर के बीच बन रहा यह पुल असम के भूपेन हजारिका पुल (तस्वीर- भूपेन हजारिका पुल) से भी करीब एक किलोमीटर अधिक लंबा है. इसका उद्घाटन वर्ष 2023 में होना था, लेकिन कोरोना के कारण विलंब हुआ और अब मार्च 2024 में संभावित है, लेकिन इसमें कुछ और विलंब हो सकता है. कोसी पर सुपौल जिले के बकौर से मधुबनी जिले के भेजा के बीच बन रहे इस महासेतु के सिरे के दोनों तरफ बने तटबंध (पूर्वी और पश्चिमी) से सीधे जोड़ा जा रहा है. इस कारण से यह महासेतु देश में सबसे लंबा हो जाएगा. बता दें कि भारतमाला प्रोजेक्ट फेज 5 के तहत निर्माण किए जा रहे इस पुल का 54 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है और इस वर्ष इसके पूर्ण होने की संभावना है.

171 पिलर और 1 किलोमीटर लंबा एप्रोच पथ होगा तैयार

बिहार का शोक कही जाने वाली कोसी नदी अपनी धारा हमेशा बदलते रहती. इसका पाट यानी दोनों धाराओं के बीच की दूरी बहुत अधिक रहती है. खास तौर पर बाढ़ के समय इसकी पाट और चौड़ी हो जाती है. बता दें कि इसमें 3.1 किलोमीटर एप्रोच रोड का भी निर्माण किया जाना है. जिनमें बकौर की ओर से 2.1 किमी और भेजा की तरफ से करीब एक किमी एप्रोच रोड बनाया जा रहा है. इस पुल में कुल 171 पिलर बन रहे हैं. इनमें 166 पिलर का निर्माण पूरा हो चुका है. बकौर की ओर से 36 पिलर और भेजा की ओर से 87 पिलर होंगे. इसमें बकौर की ओर से 2.1 किलोमीटर और भेजा की तरफ से 1 किलोमीटर एप्रोच पथ का निर्माण किया जाना है.

5 पैकेजों में बनेगा यह प्रोजेक्ट

भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत मधुबनी के उमगांव से महिषी तारापीठ (सहरसा) के बीच बन रहे फोरलेन सड़क के एलाइनमेंट में यह पुल बन रहा है. यह निर्माण कार्य दो एजेंसी मिलकर कर रही है. इसमें गैमन इंडिया एवं ट्रांस रेल लाइटिंग प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं. इस पुल का निर्माण भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत हो रहा. भारतमाला प्रोजेक्ट 5 पैकेजों में बन रहा है. इन्हीं में से एक पैकेज में इस पुल का निर्माण हो रहा है. यह पुल सामरिक दृष्टिकोण से भी बहुत ही महत्वपूर्ण है. लेकिन दिसंबर 2023 तक पुल निर्माण कार्य पूरा कर लिए जाने की संभावना थी, पर अब यह विलंब होगा और इस साल बन जाने की संभावना है.

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