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गेहूं की पराली जलाने की घटनाएं बढ़ी, UP और मध्य प्रदेश में दर्ज हुए ये आंकड़े

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गेहूं की पराली जलाने की घटनाएं बढ़ी, UP और मध्य प्रदेश में दर्ज हुए ये आंकड़े

Stubble Burning: देश में गेहूं की कटाई का सीजन जोरों पर चल रहा है. कटाई पूरी होने के बाद गेहूं की पराली यानी कि बचे हुए अवशेष को जलाने की घटनाएं सामने आई है. पराली जलाने की सबसे ज्यादा घटनाएं मध्य प्रदेश में दर्ज की गई है. इस साल गेहूं के बचे हुए अवशेष को जलाने की घटनाओं में 23 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. इस मामले में मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश सबसे आगे है. इन घटनाओं में हो रही बढ़ोतरी के चलते पर्यावरण विशेषज्ञ चिंता जता रहे हैं.

मध्य प्रदेश में 4%, हरियाणा में 8% मामले बढ़े

भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) के तहत काम करने वाली सीआरईएएमएस (CREAMS) नामक संगठन की रिपोर्ट में पराली जलाने की घटनाओं के आंकड़े सामने आए हैं. इस रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले साल के मुकाबले इस साल उत्तर प्रदेश में पराली जलाने की घटनाएं दोगुनी हुई और मध्य प्रदेश में 4% और हरियाणा में 8% मामले बढ़ गए. रिपोर्ट में पता चला कि राजस्थान में पराली जलाने की घटनाओं पर नजर नहीं रखी जाती.

सेटेलाइट से दर्ज हुई घटनाएं

हर साल सेटेलाइट के जरिए इन पराली जलाने की घटनाओं पर नजर रखी जाती है. जिससे मिले आंकड़ों में 1 से 22 अप्रैल के बीच मध्य प्रदेश में 22775 पराली जलाने की घटनाएं दर्ज की गई है. दूसरे नंबर पर उत्तर प्रदेश में 9952 घटनाएं रिकॉर्ड हुई. हरियाणा में 108 और पंजाब में 88 घटनाएं देखने को मिली. जानकारों का कहना है कि किसानों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करना होगा जिससे इन घटनाओं में कमी आ सके.

मध्य प्रदेश के रायसेन, उज्जैन, विदिशा, होशंगाबाद इत्यादि कई जिलों में पराली जलाने की घटनाएं दर्ज की गई. इसके अलावा उत्तर प्रदेश के गोरखपुर, महाराजगंज, सिद्धार्थनगर, देवरिया इत्यादि जिलों में गेहूं के अवशेष जलाने की घटनाएं दर्ज की गई.

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