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बाढ़ प्रभावित इलाकों में किसान करें ये खेती, उत्पादन बढ़ेगी तो आमदनी भी ज्यादा मिलेगी

UP News :भारत में कुछ इलाके ऐसे हैं जौ बाढ़ प्रभावित क्षेत्र है. वहां पर बाढ़ आने के कारण किसानो की फसल चौपट हो जाती है जिस वजह से किसानों के फसल का भी खर्च पूरा नहीं होता बीज खाद के पैसे जेब से लगते है. ऐसे में हम उन किसानों के लिए धान की एक ऐसी वैरायटी की बात कर रहे हैं जो बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में बिजाई करने पर किसानों को देगी अच्छा मुनाफा.
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बाढ़ प्रभावित इलाकों में किसान करें ये खेती, उत्पादन बढ़ेगी तो आमदनी भी ज्यादा मिलेगी

Saral Kisan, UP News : भारत में कुछ इलाके ऐसे हैं जौ बाढ़ प्रभावित क्षेत्र है. वहां पर बाढ़ आने के कारण किसानो की फसल चौपट हो जाती है जिस वजह से किसानों के फसल का भी खर्च पूरा नहीं होता बीज खाद के पैसे जेब से लगते है. ऐसे में हम उन किसानों के लिए धान की एक ऐसी वैरायटी की बात कर रहे हैं जो बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में बिजाई करने पर किसानों को देगी अच्छा मुनाफा. पानी से बढ़ाने वाली यह फसल किस को कर देगी मालामाल, उत्तर प्रदेश में बलिया के एक कृषि विज्ञान केंद्र में इस बीज पर काफी सालों से  रिसर्च चल रहा था। उत्तर प्रदेश का बलिया जिला वार्ड प्रभावित क्षेत्र है ऐसे में धान की यह प्रजाति यहां के किसानों के लिए काफी हद तक फायदेमंद रहेगी।

यह है खास प्रजातियां

बाढ़ क्षेत्र इलाकों के लिए धान कि यह कुछ खास प्रजातियां हैं, जो आसानी से ज्यादा पैदावार देकर किसानों को लाभान्वित करती है. जल लहरी, जल निधि, जल प्रिया और बाढ़ अवरोधी ये धान की ऐसी प्रजातियां हैं, जो बाढ़ क्षेत्र में भी ज्यादा उपज देती हैं. यह किसम जैसे जैसे पानी ऊपर बढ़ता है उसी की तरह जल्दी जल्दी  बढ़ती जाती हैं, पानी के भाव से पानी में गिर कर खराब नहीं होती हैं.

बीज की मात्रा 

एक एकड़ के लिए बीज की मात्रा 10 से 12 किलोग्राम  काफी रहती है. अगर बाढ़ का पानी नहीं सूखता है तो  इसकी कटाई किसान नाव से भी के सकते है. धान की यह किसम लगभग 5 से 6 महीने की यह पक कर काटने योग्य हो जाती है. इस तरह एक बीघा में लगभग 10 से 12 क्विंटल उपज बहुत आसानी से हो जाती है. ज्यादा पैदावार देकर किसानों को लाभान्वित करती है.

बाढ़ क्षेत्र में कुछ ऐसे जगह होते हैं जहां पानी लंबे समय तक भरा ही रह जाता है, उस स्थिति में स्वर्ण सब 01 धान की, जो प्रजाति है यह बेहतर है. उस समय इसकी पैदावार बहुत ज्यादा होती है और किसानों के लिए काफी लाभप्रद होती है. इसकी खेती बहुत आसानी से की जा सकती है.

बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में नर्सरी डालकर रोपाई करना संभव नहीं हो पता है, तो इस परिस्थिति में ऐसी जगह पर धान की खेती सिड्विल या छिड़काव विधि से सीधे बुवाई कर दी जाती है और धान के पौधे बढ़ते रहते हैं. समय के अनुसार पानी की स्थिति घटती बढ़ती रहती है. जिसका कोई दुषप्रभाव इन फसलों पर नहीं पड़ता है.

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