खाद्य तेलों के रेटों में आया उछाल, दालों और सब्जियों की कीमतें हुई कम 

Sarson Ka tel : सरसों तेल के खाद्य मूल्य सूचकांक में उछाल के बाद 15 और सूरजमुखी के तेल में करीबन 14 अंक का उछाल देखने को मिला है हालांकि मूंगफली का तेल सस्ता हुआ है। वही दालों और सब्जियों की कीमतों में गिरवाट देखने को मिल रही है। 

 

Mustard Oil Price : कई महीनों से अधिकतर खाद्य वस्तुओं की कीमतों में गिरावट देखी जा सकती है, परंतु खाद्य तेल की कीमतों में उछाल देखने को मिल रहा हैं। अभी के समय में सरसों और सूरजमुखी के तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी का दौर जारी है। आरबीआई (RBI) द्वारा जारी की गई मासिक रिपोर्ट के अनुसार खाद्य तेल के साथ बीते एक महीने के दौरान व्यक्तिगत देखभाल और कुछ अन्य वस्तुओं के दामों में उछाल देखने को मिला है, जिनकी कीमतों में करीबन पांच से छह फीसदी का उछाल आया है।

केंद्रीय बैंक के अनुसार अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर एक अच्छा संकेत माना जा सकता है। जीएसटी में कटौती के चलते महंगाई में इधर कमी देखने को मिल रही है और ग्रामीण व शहरी इलाकों में मांग में बढ़ोतरी हुई है। कई खाद्य चीजों को छोड़ दिया जाए तो अधिकतर क्षेत्रों में सकारात्मक रिपोर्ट देखने को आई है। वहीं आरबीआई की रिपोर्ट के मुताबिक पता चलता है कि बीते साल में खाद्य तेल महंगा हुआ है। 

बता दें कि सरसों तेल में खाद्य मूल्य सूचकांक 15 और सूरजमुखी के तेल में करीबन 14 अंक तक बढ़ गया है। वहीं मूंगफली के तेल में गिरावट देखने को मिली है। दूसरी ओर दालों व सब्जियों की कीमतों में भी नरमी देखने को मिल रही है। वहीं बीते 1 महीने के दौरान घरेलू उपयोग में आने वाली चीज और उससे जुड़े सामान की कीमतों में भी करीबन 6% तक की बढ़ोतरी हुई है। घरेलू सामान में उपयोग होने वाले साबुन, शैंपू, टूथब्रश, स्वास्थ्य सेवा, कपड़ा, बैग, पर्स, मोबाइल और अन्य जरूरी सामानों को शामिल किया गया है। 

जानिए बीते 1 वर्ष के दौरान खाद्य मूल्य सूचकांक की स्थिति

खाने की चीजें  नवंबर 2024 नवंबर 2025
सरसों 115 129.5
सूरजमुखी  107  121.2 
मूंगफली  109  100.7 
आलू  175  122.5 
प्याज  148  71.0 
टमाटर  180  151.0 
चना दाल  115  105.10 
मूंग दाल  100  95.2 
अरहर दाल  108  77.1 

महंगाई में कमी से लाभ का स्तर 

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर ने बताया कि महंगाई में कटौती का लाभ जमीनी स्तर पर सीमित वस्तुओं में दिखाई दे रहा है. इसकी सबसे बड़ी वजह है कि किसान से थोक व्यापारी द्वारा सामान को सीमित दाम पर खरीदा जाता है, जिसमें थोक और खुदरा व्यापारी मोटा मुनाफा जोड़कर वस्तुओं को बेचते हैं, जिससे आम आदमी तक सस्ती चीज़ पहुंचना बहुत ही सीमित हो गया है. 

वही रिपोर्ट में सरकार द्वारा लिए गए आंकड़े अधिकतर सरकारी स्टोर से लिए जाते हैं, जबकि खुदरा बाजार में उन उत्पादों की कीमतें कहीं अधिक होती है यही वजह है कि आंकड़े और खुदरा बाजार में उपलब्ध वस्तुओं की कीमतों में काफी अंतर देखने को मिलता है।