Sirsa News: सिरसा में मनरेगा को लेकर सियासी घमासान, सांसद कुमारी सैलजा आज करेंगी प्रेस कॉन्फ्रेंस
Sirsa News: हरियाणा की राजनीति में मनरेगा को लेकर चल रही बहस एक बार फिर तेज होने जा रही है। कांग्रेस संगठन ने हाल ही में कुमारी सैलजा को सिरसा जिले का चेयरमैन भी नियुक्त किया है। ऐसे में यह उनका पहला बड़ा राजनीतिक कार्यक्रम माना जा रहा है, जिसमें वह स्थानीय कार्यकर्ताओं से मुलाकात करने के साथ-साथ जिले में विभिन्न कार्यक्रमों में भी हिस्सा लेंगी।
Kumari Selja: हरियाणा की राजनीति में मनरेगा को लेकर चल रही बहस एक बार फिर तेज होने जा रही है। कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव और सिरसा लोकसभा सीट से सांसद कुमारी सैलजा शनिवार को सिरसा पहुंच रही हैं। उनके दौरे को पार्टी की ओर से काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि इस दौरान वह मनरेगा में हाल ही में किए गए बदलावों को लेकर केंद्र और राज्य सरकार पर तीखा हमला करने की तैयारी में हैं।
कांग्रेस की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार, कुमारी सैलजा दोपहर करीब दो बजे बेगू रोड स्थित कांग्रेस भवन में पत्रकार वार्ता करेंगी। पार्टी नेताओं का कहना है कि इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में वह मनरेगा से जुड़े कुछ अहम मुद्दों और कथित अनियमितताओं को सामने रखेंगी। इसके साथ ही बीजेपी सरकार द्वारा योजना में किए गए बदलावों पर सवाल उठाते हुए इसे गरीबों और मजदूरों के हितों के खिलाफ बताया जाएगा।
कांग्रेस संगठन ने हाल ही में कुमारी सैलजा को सिरसा जिले का चेयरमैन भी नियुक्त किया है। ऐसे में यह उनका पहला बड़ा राजनीतिक कार्यक्रम माना जा रहा है, जिसमें वह स्थानीय कार्यकर्ताओं से मुलाकात करने के साथ-साथ जिले में विभिन्न कार्यक्रमों में भी हिस्सा लेंगी। पार्टी सूत्रों का कहना है कि मनरेगा का मुद्दा फिलहाल कांग्रेस की प्राथमिकता में है और इसी के जरिए वह सरकार को घेरने की रणनीति पर काम कर रही है।
मनरेगा के नाम और स्वरूप में बदलाव पर विवाद
दरअसल, केंद्र सरकार ने हाल ही में मनरेगा योजना के नाम और कुछ प्रावधानों में बदलाव किया है। अब इस योजना को “वीबी-जी राम जी” यानी “विकसित भारत – रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन” के नाम से जाना जाएगा। सरकार का तर्क है कि नए नाम और कुछ संशोधनों के जरिए योजना को अधिक प्रभावी और व्यापक बनाया जा रहा है, ताकि ग्रामीण इलाकों में रोजगार के अवसर बढ़ सकें।
हालांकि, कांग्रेस का आरोप है कि यह बदलाव केवल नाम बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए योजना के मूल स्वरूप से छेड़छाड़ की जा रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि मनरेगा जैसी महत्वाकांक्षी योजना की पहचान उसके नाम और उद्देश्यों से जुड़ी है, और इसे बार-बार बदलना जनता को भ्रमित करने जैसा है।
बीजेपी मंत्रियों का जवाब
इससे पहले हरियाणा सरकार के शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा और कैबिनेट मंत्री रणबीर गंगवा डबवाली के दौरे पर आए थे। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा था कि कांग्रेस अपने कार्यकाल में भी योजनाओं के नाम बदलती रही है और अब वह इसी मुद्दे पर राजनीति कर रही है। मंत्रियों का कहना था कि सरकार ने केवल योजना को नए सिरे से ब्रांडिंग दी है और इसके क्रियान्वयन में सुधार किया है, ताकि ज्यादा से ज्यादा जरूरतमंद लोगों तक इसका लाभ पहुंच सके।
बीजेपी नेताओं ने यह भी स्पष्ट किया कि इस योजना में केंद्र और राज्य सरकार के बीच खर्च का अनुपात 60:40 ही रहेगा, जैसा पहले था। हालांकि, कुछ मानकों और प्रक्रियाओं में बदलाव किए गए हैं, ताकि काम की गुणवत्ता और पारदर्शिता बढ़ाई जा सके।
सियासी श्रेय लेने की होड़
मनरेगा को लेकर फिलहाल कांग्रेस और बीजेपी, दोनों ही दल आमने-सामने हैं। कांग्रेस इसे अपनी सरकार के समय शुरू की गई ऐतिहासिक योजना बताकर इसके मूल स्वरूप को बचाने की बात कर रही है, जबकि बीजेपी का कहना है कि वह इसे नए दौर की जरूरतों के हिसाब से और अधिक प्रभावी बना रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में मनरेगा का सीधा असर करोड़ों लोगों पर पड़ता है, इसलिए इस मुद्दे पर सियासत होना स्वाभाविक है। दोनों ही पार्टियां इसे अपने-अपने तरीके से जनता के सामने रखने और श्रेय लेने की कोशिश में जुटी हैं।
आगे की रणनीति पर नजर
कुमारी सैलजा की प्रेस कॉन्फ्रेंस को कांग्रेस की ओर से एक बड़े राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि वह केवल मनरेगा तक सीमित न रहकर प्रदेश और केंद्र सरकार की नीतियों पर भी सवाल उठा सकती हैं। इसके बाद उनके सिरसा में अन्य स्थानीय कार्यक्रमों में शामिल होने की भी योजना है, जहां वह पार्टी कार्यकर्ताओं से संगठन को मजबूत करने पर चर्चा करेंगी। फिलहाल, मनरेगा को लेकर चल रही यह सियासी जंग आने वाले दिनों में और तेज होने के संकेत दे रही है। सभी की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि कुमारी सैलजा अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में कौन-कौन से नए मुद्दे उठाती हैं और सरकार की ओर से इसका क्या जवाब आता है।