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पैसों की पोटली से कम नहीं हाइब्रिड धान की ये किस्म, कम पानी में ज्यादा उत्पादन और रोगों से दूर

आपको हाइब्रिड दान की कुछ किस्म के बारे में बताएंगे जो कम पानी में पककर तैयार हो जाती है और उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी ज्यादा है.
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पैसों की पोटली से कम नहीं हाइब्रिड धान की ये किस्म, कम पानी में ज्यादा उत्पादन और रोगों से दूर
Paddy : किसान धान की फसल की तैयारी में लगे हुए हैं. और आज के दौर में हर कोई चाहता है कि कम उर्वरकों को इस्तेमाल बावजूद धान का उत्पादन अच्छा हो. जिससे किसानों की लागत में भी कमी आए और आमदनी भी ज्यादा होगी. अगर आप कम उर्वरकों के इस्तेमाल बाद अच्छा उत्पादन लेना चाहते हैं तो धान की हाइब्रिड किस्म हुआ सकते हैं. इन किस्म की रोग प्रतिरोधक क्षमता ज्यादा होने के कारण इसमें रोगों से फसल बची रहती है. जिसके चलते किसानों को ज्यादा पैसा खर्च नहीं करना पड़ता. किस्म का दाना मोटा होने के कारण अन्य धान के मुकाबला यह ज्यादा वजनदार होती है. जिसका किसानों को सीधा फायदा मिलता है. 

PHB 71 हाइब्रिड किस्म, 

कृषि विज्ञान केंद्र नियामतपुर के प्रभारी डॉक्टर एन सी त्रिपाठी ने बताया कि हाइब्रिड धान की किस्म PHB-71 जो पायनियर सीड्स कंपनी तैयार करती है. यह किस्म किसानों को लाभ देने में बेहद कारगर है. उन्होंने बताया कि यह किस्म में 130 से 135 दिन में पक जाती है और किसानों को 60 से 80 हेक्टेयर प्रति क्विंटल के हिसाब से पैदावार मिल जाती है. इसकी बाली का दाना लंबा होता है और खाने में इसका स्वाद अच्छा होता है. पानी की कमी वाले किसानों के लिए यह किस्म और भी ज्यादा फायदेमंद है क्योंकि यह सूखा प्रभावित क्षेत्रों में लगाई जा सकती है. क्योंकि इसको कम पानी की जरूरत पड़ती है.

अराइज 6444 गोल्ड किस्म,

डॉक्टर एनसी त्रिपाठी ने बताया कि धान की अराइज 6414 गोल्ड किस में जो बीएलबी रोग के प्रति प्रतिरोधी है. यह हाइब्रिड की किस्म 135 से 140 दिनों में पककर तैयार हो जाती है. यह सुखे के प्रति सहनशील है  किसानों को यह धान की किस्म 30 से 35 क्विंटल प्रति एकड़ के हिसाब से उत्पादन देती है. धान की इस किस्म की एक खास बात और है कि विपरीत परिस्थितियों में भी इसके पौधे खड़े रहते हैं. यह किस्म में भारत के कई राज्यों में उगाई जाती है.

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