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अगर खेत में आ गई है जिंक की कमी, तो उत्पादन पर पड़ेगा गहरा प्रभाव

खेती करने वाला हर किसान अच्छी पैदावार लेना चाहता है। यही पैदावार बढ़ाने के लिए वह तरह-तरह की उर्वरकों और खादों का इस्तेमाल करता है। इससे काफी हद तक तुम हो सकता क्योंकि कमी पूरी हो जाती है, लेकिन फिर भी कई तत्वों की कमी रह जाती है।
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अगर खेत में आ गई है जिंक की कमी, तो उत्पादन पर पड़ेगा गहरा प्रभाव

Saral Kisan : खेती करने वाला हर किसान अच्छी पैदावार लेना चाहता है। यही पैदावार बढ़ाने के लिए वह तरह-तरह की उर्वरकों और खादों का इस्तेमाल करता है। इससे काफी हद तक तुम हो सकता क्योंकि कमी पूरी हो जाती है, लेकिन फिर भी कई तत्वों की कमी रह जाती है। जिसमें अक्सर जिंक की कमी को देखा जा सकता है। 

बहुत जरूरी है जिंक 

फसलों के ऊपर लेने के लिए मिट्टी में उपस्थित पोषक तत्वों का सही मात्रा में होना जरूरी है। इन तत्वों की कमी आने के कारण फसलों में किट और रोग जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। जिससे फसल सही समय पर बढ़ नहीं पाती और इसका असर उत्पादन पर पड़ता है। अगर आपकी मिट्टी में जिंक की कमी आ गई है तो यह सभी फसलों पर विपरीत असर डालती है। जिस तरह धान की फसल बोने के बाद गेहूं की फसल बोई जाती है, तो उसमें जिंक की आवश्यकता अधिक होती है। जिंक की कमी से फसलों के नुकसान को बचाने के लिए यह जानकारी बहुत जरूरी है। 

धान में जिंक की कमी से दिखते हैं इस रंग के धब्बे

धान की रोपाई के दो से चार सप्ताह के बाद पत्तियों पर धब्बे दिखाई देने लगते हैं। धीरे-धीरे यह धब्बे आकार में बड़े होते जाते हैं। इसे खैरा रोग नाम से जाना जाता है। यह दरअसल धान में जिंक की कमी को दर्शाता है। धान में जिंक की अधिक कमी होने के कारण जड़ों की वृद्धि रुक जाती है और इसका असर फसल के उत्पादन पर पड़ता है। 

गेहूं में जिंक की कमी के लक्षण 

गेहूं की फसल पर भी जिंक की कमी का गहरा प्रभाव पड़ता है। जिंक की कमी आ जाने के कारण पौधों की पत्तियों पर मतमेले हरे रंग के धब्बे दिखाई देने लगते हैं। इसके फल स्वरुप थोड़े दिन बाद पत्तियां गिरनी शुरू हो जाती है। गेहूं के फसल में जिंक की कमी के कारण पौधे छोटा रह जाते हैं। ऐसे लक्षणों की जांच करके किसानों को दूर करने के उपाय जानने चाहिए। 

ऐसे होगी जिंक की कमी पूरी 

खेत में जिनकी कमी को पूरा करने के लिए आप कई तरह के रासायनिक उर्वरकदार डाल सकते हैं। जिसमें से मुख्यतः जिंक सल्फेट और जिंक चिलेट्स आते हैं। समानता जिंक सल्फेट में 21% और जिंक चिलेट्स में 12% जिंक की मात्रा पाई जाती है। मिट्टी की जांच करने के बाद कमी के आधार पर 25 से 50 किलोग्राम जिंक सल्फेट प्रति हेक्टेयर इस्तेमाल किया जा सकता है। 

फसल बोते समय करें यह काम 

अगर धान की खेती के बाद आप भी गेहूं की फसल उगाने का प्लान बना रहे हैं, तो जिंक की आपूर्ति करना बहुत जरूरी होता है। आप 25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर के हिसाब से जिंक का इस्तेमाल कर सकते हैं, जो करीबन आपको ₹1000 तक पड़ेगा। इससे आपको 15 से 20% उत्पादन अधिक मिलेगा, जिससे प्रति हेक्टेयर 5 से ₹6000 का फायदा हो जाएगा। हर साल हमें जिंक डालने की जरूरत नहीं पड़ती है। क्योंकि एक बार जिंक डालने के बाद यह 3 साल तक काम करती है। जिंक का इस्तेमाल आप खेत की तैयारी करते समय या फसल की बुवाई के समय कर सकते हैं। इसके साथ ही खड़ी फसल में जिंक सल्फेट 0.5 से 1% का घोल बनाकर भी स्प्रे कर सकते हैं।   

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