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Haryana Farmers News: गेहूं की इस किस्म से हरियाणा के किसानों की हुई मौज, प्रति एकड़ मिलेगी 40 क्विंटल की पैदावार

हरियाणा के हिसार जिले में चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी में लगाए गए दो दिवसीय मेले में किसानों के लिए गेहूं की 1207 किस्म सबसे अधिक डिमांड में चल रही है।
 
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Haryana Farmers News: गेहूं की इस किस्म से हरियाणा के किसानों की हुई मौज, प्रति एकड़ मिलेगी 40 क्विंटल की पैदावार

Haryana Farmers News: हरियाणा के हिसार में स्थित चौधरी चरण सिंह कृषि विश्वविद्यालय में लगाए गए दो दिवसीय किसान मेले में गेहूं की 1207 किस्म की काफी डिमांड की जा रही है। मेले में सबसे अधिक किसानों का दबदबा इसी स्टॉल पर देखने को मिला। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार डब्ल्यूएच 1270, 303 तथा 187 किस्म 40क्विंटल प्रति एकड़ तक की उपज देंगी।

कुलपति प्रो. बीआर काम्बोज ने कहा कि किसानों को हर समय नई प्रौद्योगिकियों और तकनीकों को अपनाते रहना चाहिए। आज कृषि क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका लगातार बढ़ती जा रही है।

प्रदेश की किसान महिलाओं को ड्रोन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। महिलाओं को भी तकनीक का प्रशिक्षण लेना होगा, अन्यथा वे मुश्किलों का सामना नहीं कर पाएंगे। बदलते मौसम के अनुसार खेती करते समय अधिक सावधान रहना होगा।

रोग प्रतिरोधी और पाले के प्रति सहनशील सरसों की किस्म आरएच 725 और गेहूं की अधिक उत्पादकता वाली किस्म डब्ल्यूएच 1270 का उल्लेख किया। यह भी बताया कि सीएसवी 53 एफ और एचजे 1514, जो हुए खरीफ फसलों में चारे वाली ज्वार की अधिक पैदावार देते हैं; एचएचबी 299 और एचएचबी 311, जो जिंक और लौह तत्व से भरपूर हैं; और मूंग की एमएच 421 किस्म।

महाराणा प्रताप उद्यान विश्वविद्यालय करनाल के कुलपति डॉ. सुरेश कुमार मल्होत्रा ने कहा कि प्रगतिशील किसान नवाचारों और प्रौद्योगिकियों को अपनाने में हरियाणा सबसे आगे है।

किसान खाद्य सुरक्षा, खाद्य भंडारण, जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संरक्षण जैसे कई मुद्दों का समाधान कर सकते हैं।

तिलहनी व दलहनी फसलों की मांग से अधिक उत्पादन होने के कारण आयात करना पड़ता है। खरीफ और रबी सीजनों के अलावा, रबी सीजन के तुरंत बाद आने वाली गर्मी के मौसम में कम अवधि की फसल लेने के लिए भी प्रेरित किया।

HASU के कुलपति प्रो. बी.आर. काम्बोज ने कहा कि ड्रोन तकनीक खेती में तेजी से महत्वपूर्ण बन रही है। किसानों को खाद्य सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण संरक्षण और फसलों में कीटनाशक के प्रयोग से निपटने के लिए नई तकनीकों को अपनाना होगा।

सिफारिशों के अनुसार ड्रोन द्वारा जल विलय उर्वरक, कीटनाशक और खरपतवार नाशक को समान तरीके से आसानी से छिडक़ाव किया जा सकता है। जिससे लागत कम होगी और संसाधनों की बचत होगी।

प्रगतिशील किसानों को प्रो.बीआर काम्बोज, महाराणा प्रताप उद्यान विश्वविद्यालय करनाल के कुलपति डॉ. सुरेश कुमार मल्होत्रा और गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय हिसार के कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने सम्मानित किया।

पहले दिन, हरियाणा, दिल्ली, पंजाब, राजस्थान और उत्तर प्रदेश से लगभग 40 हजार किसान मेले में आए। करीब 46600 रुपये के खरीफ फसलों के बीज और करीब 21.08 लाख रुपये के फलदार पौधों और सब्जियों के बीज खरीदें।

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