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छतरपुर में जलवायु परिवर्तन के से किसान कर रहें फसलों में बदलाव, ग्रीष्म काल में बो रहे मूंग

Chhatarpur News :किसानों ने रबी सीजन की फसल कटाई पूरी कर ली है अब किसान आगामी तैयारी कर रहे हैं, किसान अभी मूंग की खेती की तैयारी कर रहे हैं, मूंग ऐसी फसल है जिसकी 60 दिनों मै कटाई कर ली जाती है, कम पानी की जरूरत होती है.
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छतरपुर में जलवायु परिवर्तन के से किसान कर रहें फसलों में बदलाव, ग्रीष्म काल में बो रहे मूंग
Saral Kisan, Chhatarpur News : किसानों ने रबी सीजन की फसल कटाई पूरी कर ली है अब किसान आगामी तैयारी कर रहे हैं, किसान अभी मूंग की खेती की तैयारी कर रहे हैं, मूंग ऐसी फसल है जिसकी 60 दिनों मै कटाई कर ली जाती है, कम पानी की जरूरत होती है. इस 2 महीने की खेती से किसानों को फायदा होगा क्योंकि किसान इस फसल की कटाई के तुरंत बाद खरीफ सीजन की तीसरी फसल भी बोल सकते हैं, बुंदेलखंड में भी किसान 1 साल में तीन बार खेती करने का फायदा उठा रहे हैं.

पानी के साधन वाले किसान अपना रहे तीसरी फसल तरीका 

छतरपुर के अनेकों किसानों ने ग्रीष्म कालीन मूंग की फसल बोई है। जो केवल 60 दिन में पक कर तैयार हो जाती है। जिन जमीन में गेहूं की बुवाई की गई थी उन्हीं खेतों में मूंग फसल लेने से उर्वरकों की आवश्यकता भी कम हो जाती है, साथ ही बीमारी का प्रकोप नहीं होने से पर उत्पादन भी अच्छा होता है। जिले में पानी की कमी होने के बाद भी किसानों द्वारा फसल की सिंचाई नवीन पद्धति स्प्रिंकलर, रेन गन के माध्यम से की जा रही है। बाजार में मूंग फसल की कीमत अधिक होने से भी किसान मूंग की खेती की तरफ आकर्षित हो रहे हैं।

विभाग ने बताए खेती के लाभ 

डॉ. सुरेश पटेल ने भी सिंचाई वाले क्षेत्रों के लिए मूंग फसल को फायदे का सौदा बताया है, केवल 60 दिन में पक कर तैयार हो जाती है, इसमे में रोग कम आना और अच्छी वेरायटी के बीजों से ज्यादा उत्पादन होता है। छतरपुर में इस वर्ष ग्रीष्मकालीन मूंग 543 हेक्टेयर में बिजाइ की गई है। मूंग किसानों द्वारा लगाई जाने वाली दलहनी फसलों में आती है। मूंग में 24 प्रतिशत प्रोटीन के साथ रेशे एवं लौह तत्व भी भरपूर मात्रा में होते हैं। मूंग की जल्दी पकने वाली एवं उच्च तापमान को सहन करने वाली प्रजातियों के विकास के कारण भी मूंग की खेती लाभदायक हो रही है। फसल कृषि विभाग के अनुसार ग्रीष्मकालीन मूंग की उत किस्में पूसा विशाल, विराट, विराट-55, के-85 है। उक्त किस्में 65 से 75 दिन में तैयार हो जाती है, यदि सब ठीक रहा तो उत्पादन 12 से 15 क्विंटल प्रति हेक्टेयर बताया गया है, जबकि खरीफ सीजन में 6 से 7 क्विंटल तक ही प्रति हैक्टेयर उत्पादन है।

डॉ. सुरेश पटेल, उप संचालक कृषि विभाग का यह कहना कि ग्रीष्मकालीन मूंग में रोग-बाधाएं कम लगती हैं और उत्पादन अच्छा होता है। जिस क्षेत्रों में सिचाई के पर्याप्त साधन हैं और आसानी से पानी की उपलब्धता है। वहां पर किसानों को ग्रीष्मकालीन मूंग के लिए प्रोत्साहित किया गया है। ग्रीष्मकालीन मूंग की फसल को बढ़ावा देने के लिए विभाग किसानों को इसकी और प्रेरित कर रहा है।
 

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